यात्रा योजना · 48 घंटे

वाराणसी में दो दिन: नदी की घड़ी के हिसाब से योजना

वाराणसी दो घड़ियों पर चलती है - भोर और सांझ - और दिन का बीच का हिस्सा गर्मी और भीड़ का होता है। ज़्यादातर यात्री जिन चार चीज़ों के लिए आते हैं, उनके लिए दो दिन काफ़ी हैं, अगर योजना उन घड़ियों के साथ बनाएँ, उनके ख़िलाफ़ नहीं। यही योजना हम अपने अतिथियों को देते हैं।

जानकारी जाँची गई ·

दिन 1: पहुँचें, आराम करें, फिर आरती

दोपहर तक पहुँचें - वाराणसी जंक्शन होटल से करीब 2 किमी है, हवाई अड्डा करीब 20 किमी - और दोपहर 12 बजे चेक-इन करें। फ्लेवर्स में दोपहर का खाना खाएँ और दोपहर आराम से बिताएँ; दिन का मुख्य आयोजन अँधेरा होने के बाद है।

दशाश्वमेध घाट की शाम की गंगा आरती अक्टूबर से मार्च तक करीब शाम 5:45 बजे और अप्रैल से सितंबर तक करीब 6:45 बजे शुरू होती है, और लगभग 45 मिनट चलती है। शुरुआत से करीब 90 मिनट पहले होटल से निकलें - सर्दियों में लगभग 4:15 बजे - ताकि सीढ़ियों पर जगह मिल जाए, या ट्रैवल डेस्क से नाव बुक करवाकर पानी से देखें। आरती के बाद घाटों के पास खाएँ या रात के खाने के लिए शिवपुर लौट आएँ।

दिन 2: भोर में नदी

अलार्म लगा लें। सूर्योदय दिसंबर में करीब सुबह 6:35 और जून में करीब 5:05 बजे होता है; उससे करीब सवा घंटा पहले होटल से निकलें, और सूरज से 30 से 45 मिनट पहले पानी पर पहुँच जाएँ। शांत शुरुआत और सुबह-ए-बनारस की आरती के लिए अस्सी घाट से चढ़ें, या सबसे छोटे सफ़र के लिए दशाश्वमेध से। रात को ट्रैवल डेस्क से कह दें, वे गाड़ी और नाव दोनों बुक कर देंगे।

दिन 2: शांत समय में दर्शन

नाव से उतरकर उस कॉरिडोर से होते हुए काशी विश्वनाथ तक पैदल जाएँ जो अब मंदिर को नदी से जोड़ता है - कार्यदिवस की सुबह-सवेरे कतार सबसे छोटी होती है। फ़ोन, घड़ी और बैग होटल में छोड़ दें या क्लोकरूम में रखें; अंदर इनकी अनुमति नहीं है। छोटी कतार चाहिए तो पहले से मंदिर न्यास की आधिकारिक साइट पर सुगम दर्शन बुक करें।

फिर नाश्ते के लिए पुराने शहर की गलियों में घूमें, और देर सुबह तक शिवपुर लौट आएँ। अगर उस दिन आपका चेक-आउट है, तो एक शाम पहले फ्रंट डेस्क से सामान रखवाने या ठहराव बढ़ाने के लिए कह दें।

दिन 2: दोपहर बाद सारनाथ

दोपहर के खाने और आराम के बाद करीब 5 किमी दूर सारनाथ जाएँ: धमेख स्तूप और खंडहर सूर्यास्त तक खुले रहते हैं और अशोक के सिंह-शीर्ष वाला संग्रहालय शाम 5 बजे तक। अगर चल रहा हो, तो करीब 6:30 बजे स्तूप पर लाइट-एंड-साउंड शो के लिए रुकें। यह शहर का सबसे शांत आधा दिन है - यात्रा ख़त्म करने का अच्छा तरीका।

अगर दिन 2 शुक्रवार है, तो क्रम बदल लें: सारनाथ का संग्रहालय शुक्रवार को बंद रहता है, इसलिए सारनाथ दिन 1 की सुबह कर लें - होटल से सिर्फ़ 5 किमी है - और दिन 2 की दोपहर पुराने शहर के लिए रखें।

अगर तीसरा दिन हो

  • शाम को अस्सी घाट, उसकी अपनी आरती और कम भीड़ के लिए।
  • दोपहर बाद की रोशनी में अस्सी से दशाश्वमेध तक घाटों के किनारे धीमी सैर।
  • मानसून में, जब नावें बंद हो सकती हैं, नदी के बदले मंदिरों और गलियों को ज़्यादा समय दें।

अतिथि अक्सर पूछते हैं

क्या वाराणसी के लिए दो दिन काफ़ी हैं?

मुख्य चीज़ों के लिए, हाँ: शाम की गंगा आरती, सूर्योदय की नाव, काशी विश्वनाथ दर्शन और सारनाथ - सब दो दिन और दो रातों में हो जाते हैं।

वाराणसी में सबसे पहले क्या करें?

पहुँचने के दिन दशाश्वमेध की शाम की गंगा आरती, और अगली सुबह सूर्योदय की नाव।

क्या काशी विश्वनाथ और नाव एक ही सुबह हो सकते हैं?

हाँ - कॉरिडोर मंदिर को घाटों से जोड़ता है, इसलिए नाव से उतरकर पैदल जा सकते हैं। फ़ोन और बैग पीछे छोड़ दें; अंदर इनकी अनुमति नहीं है।

सारनाथ किस दिन नहीं जाना चाहिए?

शुक्रवार को, जब सारनाथ संग्रहालय बंद रहता है।

शिवपुर में ठहरें

होटल वाग्मी शिवपुर में है - शांत और रिहायशी, दशाश्वमेध घाट से करीब 6 किमी और वाराणसी जंक्शन से 2 किमी। ट्रैवल डेस्क गाड़ी और पिकअप का इंतज़ाम करती है, और रात को कह दें तो नाव भी बुक कर देती है।

इन स्रोतों से जाँचा गया

  1. Varanasi Guru - Ganga Aarti timing in Varanasi, month by month
  2. Shri Kashi Vishwanath Temple Trust - official site
  3. Kashi Official Web Portal (Varanasi district) - Sarnath Museum
  4. NOAA Global Monitoring Laboratory - solar calculator (sunrise times for Varanasi)

वाराणसी में समय और शुल्क मौसम और त्योहारों के साथ बदलते रहते हैं। ऊपर का हर आँकड़ा बताई गई तारीख़ को इन्हीं स्रोतों से पढ़ा गया है - जाने से पहले उसी दिन पुष्टि कर लें, या फ्रंट डेस्क से पूछ लें।

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