त्योहार · 24 नवंबर 2026

वाराणसी में देव दीपावली 2026: तारीख़, घाट, और देखने का तरीका

दीवाली के एक पखवाड़े बाद, कार्तिक की पूर्णिमा पर, वाराणसी अपनी नदी को रोशन करती है। 2026 में वह शाम मंगलवार, 24 नवंबर को है। उस दिन क्या होता है, कब कहाँ रहना है, और घाटों से 6 किमी दूर के होटल से इसकी योजना कैसे बनाएँ - सब यहाँ है।

जानकारी जाँची गई ·

2026 में देव दीपावली कब है?

देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है - हिंदू महीने कार्तिक की पूर्णिमा को। 2026 में यह मंगलवार, 24 नवंबर को है। द्रिक पंचांग, वाराणसी के लिए गणना करके, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 23 नवंबर रात 11:42 बजे और समापन 24 नवंबर रात 8:23 बजे बताता है, और प्रदोष-काल मुहूर्त - संध्या का वह समय जिसमें दीप जलाए जाते हैं - 24 तारीख़ को शाम 5:08 से 7:47 बजे तक।

सीधी बात यह है: दीप 24 तारीख़ की शाम को जलते हैं, और वही शाम नदी पर या उसके किनारे रहने की है। कार्तिक पूर्णिमा की सुबह बहुत से श्रद्धालु गंगा स्नान भी करते हैं, इसलिए घाटों पर भोर से ही भीड़ रहती है।

उस शाम क्या होता है

जैसे-जैसे उजाला ढलता है, दक्षिण में रविदास घाट से उत्तर में राजघाट तक घाटों की सीढ़ियाँ मिट्टी के दीयों से सज जाती हैं; विकिपीडिया के अनुसार दस लाख से भी अधिक दीये। मान्यता है कि इस रात देवता गंगा में स्नान करने पृथ्वी पर उतरते हैं, और यह पर्व त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की विजय का भी प्रतीक है। इसीलिए नाम है - देवताओं की दीवाली।

दशाश्वमेध घाट पर शाम की गंगा आरती साल के सबसे भव्य रूप में होती है। पुलिस और सशस्त्र बलों के अधिकारी दशाश्वमेध के अमर जवान ज्योति और पास के राजेंद्र प्रसाद घाट पर पुष्पचक्र अर्पित करते हैं, और लास्ट पोस्ट की धुन बजाई जाती है। दीप जलाने की यह परंपरा अपने आज के रूप में उतनी पुरानी नहीं जितनी लगती है: इसे 1991 में दशाश्वमेध घाट पर पंडित किशोरी रमण दुबे (बाबू महाराज) ने शुरू किया था।

देव दीपावली के साथ ही गंगा महोत्सव का समापन होता है - पाँच दिन का सांस्कृतिक उत्सव, जो प्रबोधिनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है।

नदी से या घाट से: कहाँ से देखें

इसे देखने के दो तरीके हैं, और दोनों अलग अनुभव हैं। नाव से आप रोशन घाटों का पूरा अर्धचंद्र एक साथ देखते हैं - वही दृश्य जो हर तस्वीर में होता है। सीढ़ियों पर आप उत्सव के भीतर होते हैं, आरती और दीयों के पास, पर पूरा फैलाव नहीं, एक हिस्सा देखते हैं।

  • नाव से नज़ारा बेहतर है और बुकिंग कठिन। इस एक रात नाव वाले सामान्य किराए से कहीं ज़्यादा लेते हैं, और नावें पहले ही भर जाती हैं। बहुत पहले बुक करें, और पैसे देने से पहले किराया, चढ़ने का घाट, रास्ता और लाइफ़ जैकेट लिखित में तय कर लें।
  • वाराणसी नगर निगम ने जनवरी 2025 में रोज़ के नाव किराए तय किए और उनकी सूची प्रमुख घाटों पर लगाई है। किराए की शिकायत काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की हेल्प डेस्क पर टोल-फ़्री 1533 पर की जा सकती है।
  • घाट पर जाना हो तो सांझ से काफ़ी पहले पहुँचें। मुख्य घाट जल्दी भर जाते हैं और उनके पीछे की गलियाँ लोगों की धीमी धारा बन जाती हैं।
  • नीचे उतरने से पहले अपने साथियों के साथ मिलने की जगह तय कर लें। उस भीड़ में फ़ोन से एक-दूसरे को नहीं ढूँढ पाएँगे।

शिवपुर से कैसे पहुँचें

होटल वाग्मी से दशाश्वमेध घाट सड़क से करीब 6 किमी है। आम शाम को यह छोटी-सी ड्राइव है। देव दीपावली पर पुराने शहर के आसपास वाहनों की आवाजाही पर रोक रहती है और नदी तक का आख़िरी हिस्सा पैदल तय करना होता है, इसलिए जल्दी निकलें - सीढ़ियों पर जगह चाहिए तो दोपहर तक, और अगर नाव सांझ से पहले चढ़नी है तो उससे भी पहले।

होटल की ट्रैवल डेस्क गाड़ी का इंतज़ाम करती है और अतिथियों के लिए नाव भी बुक करती है। इस रात के लिए, एक शाम पहले नहीं - कमरा बुक करते समय ही कह दें: देव दीपावली की नावें उस हफ़्ते से बहुत पहले ख़त्म हो जाती हैं।

त्योहारों की तारीख़ें चंद्र पंचांग पर चलती हैं और यहाँ वाराणसी के लिए द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार दी गई हैं। 2026 के लिए सड़क बंदी, घाटों की व्यवस्था और नावों के नियम ज़िला प्रशासन तारीख़ के क़रीब घोषित करता है - आपके पहुँचने पर फ्रंट डेस्क बता देगी कि क्या घोषित हुआ है।

ठहरने की योजना

देव दीपावली वाराणसी के साल की सबसे व्यस्त रात है, और पूरे शहर में कमरे हफ़्तों पहले भर जाते हैं। अगर आप 24 नवंबर की शाम के लिए आ रहे हैं, तो 23 तारीख़ को पहुँचें: 24 की सुबह स्नान या भोर की शांत नाव के लिए मिल जाती है, और आप त्योहार के दिन स्टेशन या हवाई अड्डे की भीड़ से बच जाते हैं।

  • 23 नवंबर को पहुँचें, 25 नवंबर को जाएँ - त्योहार की शाम के आसपास दो रातें।
  • कमरे के साथ ही नाव बुक कर लें।
  • सिर्फ़ छोटा बैग रखें। भीड़ घनी होती है और हाथ ख़ाली रहें तो बेहतर।

अतिथि अक्सर पूछते हैं

2026 में देव दीपावली किस तारीख़ को है?

मंगलवार, 24 नवंबर 2026 - कार्तिक पूर्णिमा। द्रिक पंचांग के अनुसार वाराणसी में पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर रात 11:42 से 24 नवंबर रात 8:23 तक है, और शाम का मुहूर्त 5:08 से 7:47 बजे तक।

देव दीपावली पर दीप कब जलाए जाते हैं?

सांझ को, प्रदोष-काल में, जो 2026 में शाम 5:08 से 7:47 बजे तक है। शाम 5 बजे से पहले घाट पर या अपनी नाव में पहुँच जाएँ।

क्या देव दीपावली और दीवाली एक ही हैं?

नहीं। दीवाली कार्तिक की अमावस्या को होती है। देव दीपावली - देवताओं की दीवाली - उसी महीने की पूर्णिमा को, करीब एक पखवाड़े बाद होती है, और सबसे बढ़कर वाराणसी के घाटों पर मनाई जाती है।

क्या देव दीपावली के लिए नाव पहले से बुक करनी पड़ती है?

हाँ। उस शाम की नावें बहुत पहले भर जाती हैं और आम दिनों से कहीं महँगी होती हैं। जल्दी बुक करें और किराया, घाट, रास्ता और लाइफ़ जैकेट लिखित में तय करें। पहले से कहने पर होटल की ट्रैवल डेस्क अतिथियों के लिए नाव बुक कर सकती है।

होटल वाग्मी से देव दीपावली के घाट कितनी दूर हैं?

दशाश्वमेध घाट सड़क से करीब 6 किमी है। त्योहार की शाम पुराने शहर के पास सड़कों पर रोक रहती है, इसलिए समय ज़्यादा लेकर चलें और आख़िरी हिस्सा पैदल चलने को तैयार रहें।

शिवपुर में ठहरें

होटल वाग्मी शिवपुर में है - शांत और रिहायशी, दशाश्वमेध घाट से करीब 6 किमी और वाराणसी जंक्शन से 2 किमी। ट्रैवल डेस्क गाड़ी और पिकअप का इंतज़ाम करती है, और रात को कह दें तो नाव भी बुक कर देती है।

इन स्रोतों से जाँचा गया

  1. Drik Panchang - Dev Deepawali 2026 date and muhurat for Varanasi
  2. Wikipedia - Dev Deepavali (Varanasi)
  3. Amar Ujala - Varanasi boat fares fixed by the Municipal Corporation (13 Jan 2025)

वाराणसी में समय और शुल्क मौसम और त्योहारों के साथ बदलते रहते हैं। ऊपर का हर आँकड़ा बताई गई तारीख़ को इन्हीं स्रोतों से पढ़ा गया है - जाने से पहले उसी दिन पुष्टि कर लें, या फ्रंट डेस्क से पूछ लें।

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